जन्म मृत्यु से मुक्ति

हम बार-बार क्यों जन्म थे और क्यों मरते हैं हमारे जन्म लेने का क्या उद्देश्य है और हम यहां क्यों आए किस काम के लिए आए यह हम कभी नहीं सोचते हमारे लगातार जन्म मृत्यु बनी रहती है और 8400000 लाख जून मिलने के बाद यह हमें एक मनुष्य जन्म मिलता है हमें इसमें भक्ति करनी चाहिए और जन्म मृत्यु से पीछा छुड़ाना चाहिए
जो साधना वेदों और गीता में वर्णित नहीं है वह नहीं करनी चाहिए इसीलिए तो आम समाज को वेदों और गीता से विपरीत अंधभक्ति में आरूढ़ कर दिया गया मात्र धन के स्वार्थ में
आज तक सभी संत महंत मंडलेश्वर ने यही कहा कि "कर्म तो भोगने ही पड़ेंगे"
विचार करे जब कर्म भोगने ही है तो भक्ति करने का क्या उदेश्य है ?
सच यह है कि वेद कहते है "परमात्मा पाप कर्म को भी काट देता है"और उस परमात्मा की भक्ति इस समय के केवल संत रामपाल जी महाराज जी दे रहे हैं आइए और अपना कल्याण करें 

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