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वास्तविक स्वतंत्रता

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स्वतंत्रता  आधुनिक काल का प्रमुख राजनैतिक  दर्शन  है। यह उस दशा का बोध कराती है जिसमें कोई  राष्ट्र ,  देश  या  राज्य द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने पर किसी दूसरे व्यक्ति/ समाज/ देश का किसी प्रकार का प्रतिबन्ध या मनाही नहीं होती। अर्थात स्वतंत्र देश/ राष्ट्र/ राज्य के सदस्य स्वशासन (सेल्फ-गवर्नमेन्ट) से शासित होते हैं।  लेकिन वास्तविक स्वतंत्रता क्या है आइए जानते हैं बार-बार जन्म, मृत्यु, वृद्धावस्था और बीमारियों के चक्र से बाहर निकलना ही वास्तविक स्वतंत्रता कहलाता है। ... यानिकि इस मनुष्य जीवन को जन्म-मृत्यु के चक्कर से छूटकारा प्राप्त करने में लगाना चाहिए। हमें वास्तविक स्वतंत्रता के लिए पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर भक्ति करने से ही हमें वास्तविक स्वतंत्र मिल सकती है अगर पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर हम सब भक्ति करते हैं तो हमारा जन्म और मरण का चक्कर समाप्त हो सकता है हम सदा के लिए वास्तविक स्वतंत्र हो सकते हैं 

महामारी के कारण और बचाव

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आज हमारे देश पूरी महामारी से जूझ रहा है  यह ऐसी भयंकर बीमारी है जो इंसान से इंसान को फैलती है यहां तक कि इंसान की मृत्यु तक हो जाती है यह प्रकृति का आपदाएं क्यों आई क्योंकि महामारी जो चीन से शुरू हुई और पूरे विश्व में फैल गई  हमारी विश्व में सच्चे संतो को सताने की सजा मिली है वह सच्चे संत जो भगवान का रूप होते हैं जो केवल सच्चाई के लिए लड़ते हैं और हमारे मोक्ष कल्याण के लिए इस पृथ्वी पर आते हैं वह है जिन्होंने सच्चाई के लिए संघर्ष किया आज हम उन्हीं के खिलाफ  है बेजुबान जानवरों को मार मार कर खाते हैं जो हमारा अधिकार नहीं है हमारे खाने के लिए फ्रूट साग सब्जी सब हैंआज हमारे वह पाप हैं जो  यह महामारी की सजा तो बहुत ही कम है  केवल इस पृथ्वी पर संत रामपाल जी महाराज है जो इस महामारी को रोक सकते हैं क्योंकि संत रामपाल जी महाराज जी सच्चे संत जो हमारे शास्त्र अनुकूल   भक्ति बताते हैं यह यह महामारी तो क्या इससे बड़ी प्रकृति आपदाएं भी tal सकते हैं हमें संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लेकर भक्ति करने से इस महामारी  से छुटकारा मिलेग...

आध्यात्मिक गुरु की क्या आवश्यकता है

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संसार में गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊपर होता है क्योंकि भगवान को मिलाने वाले गुरु ही होते हैं जो हमारे शास्त्रों से परिचित होते हैं जिनको आध्यात्मिक  ज्ञान होता है  गुरुजी ही हमारे इस मनुष्य जन्म को सफल बना सकते हैं इस 8400000 जन्म से हमें छुटकारा दिला सकते हैं  गुरु बिना ज्ञान नहीं और ज्ञान के बिना जीवन बेकार  है प्रत्येक मनुष्य के  जीवन  में एक आध्यात्मिक  गुरु की आवश्यकता  होती है.  गुरु  का काम होता है परमात्मा से सम्बन्ध स्थापित करवा देना. ... जिस तरह से एक कुशल चिकित्सक शारीरिक रोगों को दूर करके हमें स्वस्थ बना देता है, वैसे ही एक योग्य गुरु  हमारी मानसिक बीमारियों को दूर करके हमारेमन को स्वस्थ बना देता है.   पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेने से  इस लोग में भी सुख देखेंगे और परलोक को भी प्राप्त होंगे और  जन्म मरण से हमारा पीछा छूट  जाता है पूर्ण संत को पहचान कर उनकी आज्ञा मैं रहकर भक्ति करते हैं तो हमें  पूर्ण लाभ मिलता है आज के इस युग में केवल संत रामपाल जी महाराज ही आत्य...

कबीरपरमेश्वर_के_साथ_52बदमाशी

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एकबार सिकंदर लोधी ने आदेश दिया कबीरजी को खूनी हाथीआगे डाल दिया जब हाथी कविर जी से 10 कदम की दूरी पर था तो उसको कबीर जी के साथ बब्बर शेर दिखाई दिया हाथी डर के मारे लीद करता पीछे वापस हो कर भाग गया कबीर जी जंजीरे अपने आप खुल गई  एक तलवार के माध्यम से मारने का एक दुष्ट प्रयास। भगवान कबीर पर तलवार से हमला किया गया था, लेकिन तलवार भगवान कबीर के शरीर से होकर गुजरती थी क्योंकि उनका शरीर पांच तत्वों से बना नहीं है और वह बहुत शक्तिशाली है। तब सभी लोगों ने भगवान कबीर की शक्ति की प्रशंसा की दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेख तकी ने कहा कबीर जी को तब अल्लाह मानेंगे जब मेरी मरी हुई लड़की को जीवित कर देगा जो कब्र में दबी हुई है। कबीर परमेश्वर जी ने अपनी समर्थ शक्ति से हजारों लोगों के सामने उस लड़की को जीवित किया और उसका नाम कमाली रखा 

चारोंयुग_में_आए_कबीरपरमेश्वर

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ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात् उसे कवि कहने लग जाते हैं, पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है। परमात्मा कबीर साहेब ने भक्त पहलाद कि रक्षा करने के लिए नरसिंह का रूप बनाकर हिरनाकुश का  वध किया था और एक भक्त कि भक्ती को बनाए रखने के लिए परमात्मा सौ छल चितर करते हैं । कबीर परमात्मा अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अन्तर्ध्यान हो जाते हैं। उस समय लीला करने आए परमेश्वर को प्रभु चाहने वाले श्रद्धालु नहीं पहचान पाते, क्योंकि सर्व महर्षियों व संत कहलाने वालों ने प्रभु को निराकार बताया है। 

शिक्षा का समाज पर असर

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शिक्षा कि हमारे समाज में एक अहम भूमिका है शिक्षा हर एक नागरिक के लिए जरूरी है शिक्षा से हमें हर महत्वपूर्ण जानकारी होती है संस्कृति समाज सब शिक्षा पर निर्भर करता है शिक्षा, समाज एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण का प्रयास है। इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है, जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। बच्चा शिक्षा द्वारा समाज के आधारभूत नियमों, व्यवस्थाओं, समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों को सीखता है। बच्चा समाज से तभी जुड़ पाता है जब वह उस समाज विशेष के इतिहास से अभिमुख होता है। शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता तथा उसके व्यक्तित्त्व का विकसित करने वाली प्रक्रिया है। यही प्रक्रिया उसे समाज में एक वयस्क की भूमिका निभाने के लिए समाजीकृत करती है तथा समाज के सदस्य एवं एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान तथा कौशल उपलब्ध कराती है। शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की ‘शिक्ष्’ धातु में ‘अ’ प्रत्यय लगाने से बना है। ‘शिक्ष्’ का अर्थ है सीखना और सिखा...

संस्कारों का पतन

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समाज मैं फैली बुराइयों और कुरीतियों हमारी संस्कारों को बिगड़ती जा रही है आज हर कोई नशे से ग्रस्त है तो आने वाली पीढ़ी भी हमसे यही सीखेंगे तो आने वाला भविष्य हम क्या सुधरेंगे आज देश में बढ़ता भ्रष्टाचार और बुराइयां खत्म नहीं हो रही हैं क्या हमें हमारे देश से और हमारे समाज से यही उम्मीद है कि वह नशे से ग्रस्त रहें हमें हमारा समाज पाखंडवाद खत्म करना है युवाओं में नैतिकता और आत्मा तृप्त जागृति लाना है समाज में जातपात के भेद को मिटाना है समाज से हर प्रकार के नशे को दूर करना है समाज में फैली दहेज रूपी कुरीति को जड़ से खत्म करना है समाज में शांति भाईचारा स्थापित करना है सामाजिक बुराइयों को समाप्त करके स्वस्थ समाज तैयार करना है ऐसे समाज नहीं सुधर सकता लेकिन एक aadhyatmik  ज्ञान से तो सुधर ही सकता है तो आई और संत रामपाल जी महाराज जी से सत्संग  सुने और उनसे निशुल्क नाम दीक्षा आप ले सकते हैं