शिक्षा कि हमारे समाज में एक अहम भूमिका है शिक्षा हर एक नागरिक के लिए जरूरी है शिक्षा से हमें हर महत्वपूर्ण जानकारी होती है संस्कृति समाज सब शिक्षा पर निर्भर करता है शिक्षा, समाज एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण का प्रयास है। इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है, जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। बच्चा शिक्षा द्वारा समाज के आधारभूत नियमों, व्यवस्थाओं, समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों को सीखता है। बच्चा समाज से तभी जुड़ पाता है जब वह उस समाज विशेष के इतिहास से अभिमुख होता है। शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता तथा उसके व्यक्तित्त्व का विकसित करने वाली प्रक्रिया है। यही प्रक्रिया उसे समाज में एक वयस्क की भूमिका निभाने के लिए समाजीकृत करती है तथा समाज के सदस्य एवं एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान तथा कौशल उपलब्ध कराती है। शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की ‘शिक्ष्’ धातु में ‘अ’ प्रत्यय लगाने से बना है। ‘शिक्ष्’ का अर्थ है सीखना और सिखा...
एकबार सिकंदर लोधी ने आदेश दिया कबीरजी को खूनी हाथीआगे डाल दिया जब हाथी कविर जी से 10 कदम की दूरी पर था तो उसको कबीर जी के साथ बब्बर शेर दिखाई दिया हाथी डर के मारे लीद करता पीछे वापस हो कर भाग गया कबीर जी जंजीरे अपने आप खुल गई एक तलवार के माध्यम से मारने का एक दुष्ट प्रयास। भगवान कबीर पर तलवार से हमला किया गया था, लेकिन तलवार भगवान कबीर के शरीर से होकर गुजरती थी क्योंकि उनका शरीर पांच तत्वों से बना नहीं है और वह बहुत शक्तिशाली है। तब सभी लोगों ने भगवान कबीर की शक्ति की प्रशंसा की दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेख तकी ने कहा कबीर जी को तब अल्लाह मानेंगे जब मेरी मरी हुई लड़की को जीवित कर देगा जो कब्र में दबी हुई है। कबीर परमेश्वर जी ने अपनी समर्थ शक्ति से हजारों लोगों के सामने उस लड़की को जीवित किया और उसका नाम कमाली रखा
स्वतंत्रता आधुनिक काल का प्रमुख राजनैतिक दर्शन है। यह उस दशा का बोध कराती है जिसमें कोई राष्ट्र , देश या राज्य द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने पर किसी दूसरे व्यक्ति/ समाज/ देश का किसी प्रकार का प्रतिबन्ध या मनाही नहीं होती। अर्थात स्वतंत्र देश/ राष्ट्र/ राज्य के सदस्य स्वशासन (सेल्फ-गवर्नमेन्ट) से शासित होते हैं। लेकिन वास्तविक स्वतंत्रता क्या है आइए जानते हैं बार-बार जन्म, मृत्यु, वृद्धावस्था और बीमारियों के चक्र से बाहर निकलना ही वास्तविक स्वतंत्रता कहलाता है। ... यानिकि इस मनुष्य जीवन को जन्म-मृत्यु के चक्कर से छूटकारा प्राप्त करने में लगाना चाहिए। हमें वास्तविक स्वतंत्रता के लिए पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर भक्ति करने से ही हमें वास्तविक स्वतंत्र मिल सकती है अगर पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर हम सब भक्ति करते हैं तो हमारा जन्म और मरण का चक्कर समाप्त हो सकता है हम सदा के लिए वास्तविक स्वतंत्र हो सकते हैं
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