शिक्षा कि हमारे समाज में एक अहम भूमिका है शिक्षा हर एक नागरिक के लिए जरूरी है शिक्षा से हमें हर महत्वपूर्ण जानकारी होती है संस्कृति समाज सब शिक्षा पर निर्भर करता है शिक्षा, समाज एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण का प्रयास है। इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है, जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। बच्चा शिक्षा द्वारा समाज के आधारभूत नियमों, व्यवस्थाओं, समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों को सीखता है। बच्चा समाज से तभी जुड़ पाता है जब वह उस समाज विशेष के इतिहास से अभिमुख होता है। शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता तथा उसके व्यक्तित्त्व का विकसित करने वाली प्रक्रिया है। यही प्रक्रिया उसे समाज में एक वयस्क की भूमिका निभाने के लिए समाजीकृत करती है तथा समाज के सदस्य एवं एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान तथा कौशल उपलब्ध कराती है। शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की ‘शिक्ष्’ धातु में ‘अ’ प्रत्यय लगाने से बना है। ‘शिक्ष्’ का अर्थ है सीखना और सिखा...
समाज मैं फैली बुराइयों और कुरीतियों हमारी संस्कारों को बिगड़ती जा रही है आज हर कोई नशे से ग्रस्त है तो आने वाली पीढ़ी भी हमसे यही सीखेंगे तो आने वाला भविष्य हम क्या सुधरेंगे आज देश में बढ़ता भ्रष्टाचार और बुराइयां खत्म नहीं हो रही हैं क्या हमें हमारे देश से और हमारे समाज से यही उम्मीद है कि वह नशे से ग्रस्त रहें हमें हमारा समाज पाखंडवाद खत्म करना है युवाओं में नैतिकता और आत्मा तृप्त जागृति लाना है समाज में जातपात के भेद को मिटाना है समाज से हर प्रकार के नशे को दूर करना है समाज में फैली दहेज रूपी कुरीति को जड़ से खत्म करना है समाज में शांति भाईचारा स्थापित करना है सामाजिक बुराइयों को समाप्त करके स्वस्थ समाज तैयार करना है ऐसे समाज नहीं सुधर सकता लेकिन एक aadhyatmik ज्ञान से तो सुधर ही सकता है तो आई और संत रामपाल जी महाराज जी से सत्संग सुने और उनसे निशुल्क नाम दीक्षा आप ले सकते हैं
एकबार सिकंदर लोधी ने आदेश दिया कबीरजी को खूनी हाथीआगे डाल दिया जब हाथी कविर जी से 10 कदम की दूरी पर था तो उसको कबीर जी के साथ बब्बर शेर दिखाई दिया हाथी डर के मारे लीद करता पीछे वापस हो कर भाग गया कबीर जी जंजीरे अपने आप खुल गई एक तलवार के माध्यम से मारने का एक दुष्ट प्रयास। भगवान कबीर पर तलवार से हमला किया गया था, लेकिन तलवार भगवान कबीर के शरीर से होकर गुजरती थी क्योंकि उनका शरीर पांच तत्वों से बना नहीं है और वह बहुत शक्तिशाली है। तब सभी लोगों ने भगवान कबीर की शक्ति की प्रशंसा की दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेख तकी ने कहा कबीर जी को तब अल्लाह मानेंगे जब मेरी मरी हुई लड़की को जीवित कर देगा जो कब्र में दबी हुई है। कबीर परमेश्वर जी ने अपनी समर्थ शक्ति से हजारों लोगों के सामने उस लड़की को जीवित किया और उसका नाम कमाली रखा
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